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भारत ही नहीं नेपाल ने भी ड्रैगन को दिया करारा झटका

काठमांडू
भारत और नेपाल के दौरे पर बड़े अरमान लेकर आए चीनी विदेश मंत्री वांग यी को दोनों ही देशों से एक तरह से खाली हाथ लौटना पड़ा है। भारत ने जहां चीनी विदेश मंत्री को ब्रिक्‍स सम्‍मेलन को लेकर कोई आश्‍वासन नहीं दिया है, वहीं नेपाल ने भी चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के ड्रीम प्रॉजेक्‍ट कहे जाने वाले बेल्‍ट एंड रोड से क‍िनारा करने का संकेत दिया है। यही नहीं चीनी विदेश मंत्री ने एमसीसी प्रॉजेक्‍ट को नेपाली संसद में पेश किए जाने पर भी अपनी खीझ दिखाई और अमेरिका के बढ़ते प्रभाव पर नाराजगी जताई।

चीन के भारी विरोध के बाद भी नेपाल की देउबा सरकार की ओर से अमेरिका के प्रॉजेक्‍ट को नेपाली संसद में पेश किया गया था। नेपाली अखबार काठमांडू पोस्‍ट के मुताबिक चीनी विदेश मंत्री ने नेपाल के वामपंथी दलों के साथ मुलाकात के दौरान बीआरआई को लागू करने पर बहुत जोर दिया। उन्‍होंने अमेरिका के एमसीसी प्रॉजेक्‍ट के मुद्दे को भी वामदलों के साथ कड़ाई के साथ उठाया और अमेरिका के बढ़ते दखल पर नाराजगी जताई।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बीआरआई पर चुप्‍पी साधी
चीन ने एक तरफ जहां बीआरआई पर जोर दिया वहीं नेपाली वामदलों ने सीमा व्‍यापार को फिर से शुरू करने और नेपाली छात्रों के मुद्दे पर जोर दिया जिसे ड्रैगन ने लंबे समय से रोक रखा है। वांग यी ने बीआरआई के मुद्दे को पुष्‍प कमल दहल प्रचंड से भी उठाया जो अभी सत्‍तारूढ़ गठबंधन का हिस्‍सा हैं। उधर, बीआरआई के क्रियान्‍वयन के मुद्दे पर नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में चुप्‍पी साधी गई है। चीन और नेपाल के बीच साल 2017 में बीआरआई समझौता हुआ था लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

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