खड़गंवा के गज्जूपानी जलाशय के लिए 3 करोड़ रूपए से अधिक की राशि स्वीकृत
182 हेक्टेयर में बढ़ेगी सिंचाई क्षमता
रायपुर, 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य शासन के जल संसाधन विभाग ने विकासखण्ड खड़गंवा के अंतर्गत आने वाले गज्जूपानी जलाशय के जीर्णाेद्धार के लिए तीन करोड़ आठ लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस जलाशय के के जीर्णाेद्धार 182 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाइ्र की सुविधाए मिलेगी।
मुख्य नहर और बांध का होगा कायाकल्प
इस स्वीकृत राशि से गज्जूपानी जलाशय के मुख्य बांध और उसकी नहरों के जीर्णाेद्धार व मरम्मत का कार्य किया जाएगा। लंबे समय से बेहतर रखरखाव की बांट जोह रहे इस जलाशय की नहरों के सुदृढ़ीकरण से पानी की बर्बादी रुकेगी और अंतिम छोर (टेलर एंड) तक पानी आसानी से पहुंच सकेगा।
182 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगी संजीवनी
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत प्रस्तावित सभी कार्य समय सीमा के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे। कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इस जीर्णाेद्धार कार्य से क्षेत्र के कुल 182 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की बेहतर और सुनिश्चित सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादन और किसानों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होगी।
[3:43 PM, 7/14/2026] +91 94255 58741: डबरी निर्माण से बदली बस्तर के किसान सोनधर की तकदीर
जल संरक्षण के साथ आजीविका को मिली नई उड़ान
रायपुर, 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “विकसित भारत -गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन का एक बड़ा जरिया बनकर उभर रही है। इस योजना के तहत बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत खोटलापाल में कराए गए डबरी (छोटे तालाब) निर्माण कार्य ने न केवल जल संकट को दूर किया है, बल्कि स्थानीय किसान की जिंदगी में भी समृद्धि के नए रंग भर दिए हैं। ग्राम खोटलापाल निवासी किसान श्री सोनधर की भूमि पर निर्मित यह डबरी आज पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और ग्रामीण विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।
सिंचाई के संकट से मिली मुक्ति, अब ले रहे हैं अतिरिक्त फसलें
सोनधर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले वर्षा का अधिकांश पानी बहकर बर्बाद हो जाता था, जिसके कारण गर्मी के मौसम में खेतों की सिंचाई के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ता था। लेकिन डबरी निर्माण के बाद अब बारिश के पानी का प्रभावी ढंग से संचयन हो रहा है। खेतों को अब समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है।
डबरी में पानी की उपलब्धता से सोनधर को अब साल में अतिरिक्त फसल लेने का सुनहरा अवसर मिला है। पानी की प्रचुरता से पशुपालन और बाड़ी (सब्जी उत्पादन) विकास जैसी गतिविधियों को भी नया जीवन मिला है।
सिर्फ सिंचाई नहीं, मछली पालन से बढ़ी अतिरिक्त आय
यह डबरी केवल खेतों की प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनधर के लिए आजीविका का एक मजबूत अतिरिक्त साधन भी बन गई है। लाभार्थी किसान श्री सोनधर ने कहा कि अब इस डबरी में सफलतापूर्वक मछली पालन किया जा रहा है, जिससे परिवार को हर साल अच्छी अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। आने वाले समय में यहाँ बतख पालन शुरू करने की भी योजना है, जिससे आमदनी के स्रोत और बढ़ेंगे।
भूजल स्तर में सुधार और स्थानीय स्तर पर रोजगार
इस डबरी निर्माण का सकारात्मक प्रभाव केवल एक किसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका लाभ पूरे ग्रामीण परिवेश को मिल रहा है। डबरी के कारण आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर (वाटर टेबल) सुधरा है, जिससे निकटवर्ती कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता बढ़ गई है। खेतों की मिट्टी में नमी बनी रहने से आसपास की फसलों को भी लाभ हो रहा है। डबरी निर्माण के दौरान ग्राम पंचायत के जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को गाँव में ही रोजगार मिला, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और काम की तलाश में होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लगी।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
खोटलापाल में हुआ यह सफल प्रयोग यह साबित करता है कि यदि जल संरक्षण के कार्यों को जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं के समन्वय से लागू किया जाए, तो खेती, पर्यावरण और ग्रामीण आजीविकाकृतीनों को एक साथ सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
