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बिहार जाति आधारित जनगणना: लालू यादव की पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा

पटना: बिहार की राजनीति में 2 अक्टूबर, 2023 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। बिहार सरकार ने गांधी जयंती के दिन जातीय जनगणना की रिपोर्ट को जारी कर दिया। इस रिपोर्ट में सामने आया है कि सबसे ज्यादा संख्या अति पिछड़ों की है। सियासी जानकार मानते हैं कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा खुशी लालू यादव को हुई होगी। लालू प्रसाद यादव सामाजिक न्याय और अति पिछड़ों की बात करते हैं। लगातार कई दशकों से अति पिछडा का वोट उन्हें मिलते आ रहा है। इस रिपोर्ट के बाद अब उनकी पार्टी की खुशी दोगुनी हो गई है। इस रिपोर्ट से एक बात साफ है कि जो नीतीश कुमार और अन्य राजनीतिक दलों की मंशा थी। वो लगभग पूरी हुई है। हालांकि, बीजेपी इससे इतर अपना विचार रख रही है। सारी बातों को समझेंगे। सबसे पहले अति पिछड़ों की संख्या का विश्लेषण कर लेते हैं।

बिहार सरकार ने बहुप्रतीक्षित जाति-आधारित सर्वेक्षण जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार की आबादी 13 करोड़ से अधिक है, जिसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) 36.01 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 19.65 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियां 1.68 प्रतिशत हैं। ऊंची जातियों की 15.52 प्रतिशत जनसंख्या है। पिछड़े वर्गों में यादवों की आबादी 14.26 प्रतिशत, कुशवाहा और कुर्मी क्रमशः 4.27 और 2.87 प्रतिशत हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, बिहार की आबादी में हिंदू समुदाय 81.9 प्रतिशत, मुस्लिम 17.7 प्रतिशत, ईसाई 0.05 प्रतिशत, सिख 0.01 प्रतिशत, बौद्ध 0.08 प्रतिशत, जैन 0.0096 प्रतिशत और अन्य धर्मों के 0.12 प्रतिशत हैं।

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