किसानों से पानी का एमओयू, खरीफ 81, रबी 200 और गेहूं का 81 रुपए प्रति एकड़ चार्ज
राज्य सरकार और किसानों के बीच खेतों में पानी देने करार के लिए अमीन जुटे हुए हैं। जिनका एमओयू को पांच साल हो गया उनकी नवीनीकरण किया जा रहा है। 15 अगस्त से किसानों को मांग के मुताबिक खेतों में पानी दिया जाएगा। खरीफ सीजन में जरूरी पानी की भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि किस जिले में कितना पानी लगेगा यह तय नहीं रहता। यह वर्षा पर निर्भर होता है। इसलिए अमीन सिंचाई व खेतों से संबंधित मुद्दों पर गांवों में सभा भी करते हैं। बताया गया कि यदि गांव के 73 फीसदी किसान सहमति देते हैं तो उनके खेतों में पानी पहुंचाया जाता है। किसानवार लेजर तैयार किए जाते हैं।
फिर जिस तरह बिजली के बिल मौके पर जाकर मीटर रीडिंग कर निकाले जाते हैं, उसी तरह अमीन खेतों में जाकर हर किसान का रकबा चेक करते हैं। उसे कितने क्षेत्र या एकड़ में पानी दिया गया, इसकी पर्ची (बिल) बनाते हैं। इस पर शुल्क -लगान लिखा रहता है। डैम समेत अन्य चीजों के रखरखाव पर नजर रखना भी उनका काम है। अमीनों संख्या कम होने से काम प्रभावित हो रहे हैं। पटवारियों की तरह ही अमीन को डिविजनों और सब डिविजनों में इलाके बंटे होते हैं।
प्रदेश में लगभग हर जिले में एक डिविजन है। डिविजन के अधीन के 4-5 डिविजन भी होते हैं। इन डिविजनों में खरीफ फसल की 31 अक्टूबर तक और रबी फसल की 31 मार्च तक फसलों व सिंचाई का रिकार्ड अपडेट करते हैं। पूरे प्रदेश में 35-36 लाख किसान हैं। इनके खेतों की सिंचाई का हिसाब रखने के लिए केवल 350 अमीन ही हैं। राज्य में इनके 735 पद स्वीकृत हैं। इनमें से लगभग 400 ही भरे हुए हैं। बाकी खाली हैं। अमीन रिटायर होते जा रहे हैं। बालोद डिविजन में ही 12 में से चार अमीन बचे हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से ही कमी बनी हुई है।
