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छत्तीसगढ़ के लाल को मरणोपरांत शौर्य चक्र:नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए थे पूर्णानंद साहू

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के रहने वाले पूर्णानंद साहू को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। पूर्णानंद 10 फरवरी 2020 को नक्सल मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। यह सम्मान लेने पूर्णानंद के माता पिता दिल्ली गए थे। जहां उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यह सम्मान दिया। इस दौरान पूर्णानंद की वीर गाथा सुनकर उनके माता पिता भावुक हो गए।

पूर्णानंद साहू मूल रूप से जिले के जंगलपुर के इलाके के रहने वाले थे। वह बीजापुर जिले में कोबरा बटालियन में आरक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इस बीच 10 फरवरी 2020 को उन्हें यह खबर मिली थी कि कुछ नक्सल नेता जंगल में जमा हुए हैं। इस सूचना के बाद नक्सलियों का पीछा करने के लिए तीन टीमें अलग-अलग दिशाओं में सक्रिय की गई। इस बीच टीम में शामिल जवानों ने देखा कि कुछ नक्सल फोर्स को नुकसान पहुंचाने के लिए आईईडी लगा रहे हैं।

यह देखने के बाद नक्सलियों का पीछा किया गया और दोनों ओर अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। कमांडेंट ने पूर्णानंद को दूसरी साइड से कवरिंग फायर करने के निर्देश दिए थे। पूर्णानंद ने बहादुरी का परिचय देते हुए मोर्चा संभाला और नक्सलियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। नक्सली फोर्स को घेरने की कोशिश कर रहे थे कि पूर्णानंद ने अपने साइड से लगातार फायरिंग कर अपने साथियों की जान बचाई थी। फायरिंग में ही उनकी जान चले गई थी। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में यह सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया था। शहीद परिवार को सम्मान देने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद स्टेज से नीचे उतरे और पूर्णानंद के माता पिता को सम्मान दिया गया।

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