भारत की विकास यात्रा पटरी पर, टैरिफ और ग्लोबल क्राइसिस भी नहीं डाल पाएंगे बड़ा असर
व्यापार: वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिका के उच्च टैरिफ के बावजूद भारत वृद्धि की राह पर मजबूती से आगे बढ़ता रहेगा। अर्थशास्त्रियों एवं विश्लेषकों का कहना है कि भारत की विकास यात्रा वैश्विक चुनौतियों का भले ही सामना कर रही है, लेकिन मजबूत घरेलू कारकों और सतर्क रूप से विकसित होती व्यापार नीति से इस प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, मुझे लगता है कि आज अनिश्चितता वैश्विक वित्तीय संकट या कोविड काल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। हालांकि, बढ़ते व्यापार और पूंजी प्रवाह के कारण भारत विकास के मोर्चे पर उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ तेजी से तालमेल बिठा रहा है। घरेलू कारक लचीलापन प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा, सामान्य मानसून, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और भारत का मजबूत सेवा निर्यात प्रमुख सकारात्मक पहलू हैं।
जोशी ने कहा, भारत की सेवा क्षेत्र में मजबूती एक बफर के रूप में काम करती रहती है। देश के कुल निर्यात में सेवाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है, जो टैरिफ के झटकों से कम प्रभावित होती हैं। इसलिए, भारत के पास एक स्वाभाविक समर्थन है। इसके अलावा, आरबीआई की ओर से मौद्रिक नीति में ढील देने एवं सरकार के अग्रिम पूंजीगत खर्च से भारतीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। तमाम चुनौतियों के बीच उम्मीद है कि हम चालू वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी की वृद्धि दर हासिल करेंगे।
