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छत्तीसगढ़फीचर्ड

राजभवन और सरकार के बीच उलझा आरक्षण का मुद्दा अब सड़क पर पहुंचा

रायपुरः छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित होने के बाद आरक्षण विधेयक को लेकर सियासत लगातार गरमा रही है। विधेयक को विधानसभा में पारित हुए करीब 25 दिन हो चुके हैं। राज्यपाल ने सरकार से 10 बिंदुओं पर जवाब मांगे थे। सरकार ने राज्यपाल को जवाब भेज भी दिए हैं, लेकिन वे अब विधिक सलाह लेने की बात कह रही हैं। विधेयक पर चल रही राजनीति से आदिवासी समाज आक्रोश में है। इधर, सत्तारूढ कांग्रेस और विपक्षी पार्टी बीजेपी इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रही है।

सर्व आदिवासी समाज ने आरक्षण विधेयक को लेकर राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब धरना स्थल पर राजभवन का घेराव किया। कुछ दिन पहले ही सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी राजभवन में राज्यपाल से मिले थे और विधेयक पर जल्द से जल्द हस्ताक्षर करने का आग्रह किया था। उन्होंने अल्टीमेटम भी दिया था कि हस्ताक्षर नहीं हुए तो तीन दिन बाद राजभवन का घेराव किया जाएगा। संगठन का कहना है कि विधेयक अटका होने के चलते भर्तियां रुकी हुई हैं। इससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है। उन्होंने आने वाले समय में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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