फिर घूमा वक्त का पहिया… विराट और रोहित नहीं, असली विवाद तो कहीं और है
नई दिल्ली
पहेली एक तरफ सुलझती है तो दूसरी तरफ उलझ जाती है। 15 दिसंबर को दोपहर 1 बजे पूरी दुनिया को प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजार था। विराट सामने तो आए साउथ अफ्रीकी दौरे पर वनडे सीरीज खेलने से लेकर रोहित के साथ अपने अनबन की खबरों पर विराम लगाया। मगर टी-20 की कप्तानी पर जो बोल गए उसने भारतीय क्रिकेट को दो फाड़ कर दिया है। कहानी सुलझने से ज्यादा उलझ चुकी है।
वक्त का पहिया फिर से घूम चुका है। आज जिस जगह विराट खड़े हैं। ठीक 16 साल और तीन माह पहले गांगुली की भी यही हालत थी। तब सौरव टीम इंडिया के कप्तान हुआ करते थे। घटिया प्रदर्शन ने उन्हें टीम से बाहर निकलवा दिया था। कोच ग्रेग चैपल ने तीखे ई-मेल लिखते हुए बीसीसीआई से शिकायत की थी। बोला था कि सौरव कप्तानी के लायक नहीं। उनसे टीम को नुकसान हो रहा है। कैप्टेंसी छीनकर राहुल द्रविड़ को दे दी गई थी। ठीक वैसे ही जैसे आज विराट की जगह रोहित ने ले ली है।
संघर्ष और मुश्किल समय में उस वक्त गांगुली ने बीसीसीआई को अपने साथ खड़ा पाया। तब बोर्ड के अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्र ने संकट में गांगुली के समर्थन में मीडिया को एक बयान जारी किया और कहा कि कोच और क्रिकेटर को प्रोफेशनल रिलेशन कायम रखना चाहिए। बोर्ड के समर्थन और जबरदस्त कोशिशों की वजह से 10 महीने बाद गांगुली ने भारतीय टीम में वापसी की थी। कोहली के साथ ऐसा नहीं है। वह खराब फॉर्म, नहीं बल्कि एक फोन कॉल पर कप्तानी से हटाए जाने की वजह से शर्मिंदा होंगे।
