लखीमपुर खीरी कांड में क्या अपने लिए मौका देख रहा विपक्ष
चुनाव का मौसम हो तो सियासी दल फ्रंटफुट पर खेलते हैं। लोगों के दिलों को छूने वाले वोटबैंक वाले मुद्दों को सूंघकर खुद को जनता का हितैषी साबित करने की होड़ लग जाती है। लखीमपुर खीरी में रविवार को किसानों की कुचलकर हत्या की खबर आई तो देशभर में किसान आंदोलित हो गए। लेकिन अगले कुछ ही घंटों में नेताओं ने इतनी आक्रामकता दिखाई कि राजनीतिक पार्टियों ने पूरे विरोध को ‘हाइजैक’ कर लिया। सोशल मीडिया हो या टीवी चैनल हर जगह पार्टियों के प्रदर्शन छा गए हैं।
यूपी में अगले कुछ महीनों में चुनाव हैं, सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी टीमें खड़ी करने में जुटी हैं। मुद्दे राष्ट्रीय हों या क्षेत्रीय, पार्टियां संभल-संभलकर आगे बढ़ रही हैं। किसान आंदोलन का वोटबैंक पर असर कम से कम हो, बीजेपी इसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही थी तभी लखीमपुर खीरी कांड ने उसके लिए नई चुनौती खड़ी कर दी। उधर, ताक में बैठे विपक्ष को मौका मिल गया। आधी रात के बाद से कांग्रेस ही नहीं, सपा, बसपा, AAP और दूसरे दल भी अपने-अपने तरीके से किसानों के समर्थन में उतर आए हैं। बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए पार्टियां इस मुद्दे को अपने लिए ‘संजीवनी’ समझ रही हैं। क्यों किसानों से ज्यादा पार्टियां लखीमपुर कांड को लपक रही हैं। आइए हर पार्टी के हिसाब से इसे समझते हैं।
