ऐसे ही बढ़ती रहीं ग्रीनहाउस गैसें तो 2060 तक बदल जाएगी अटलांटिक महासागर में हवाओं की चाल
ऐरिजोना
ग्रीन हाउस गैसों (GHGs) के उत्सर्जन के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले असर से आने वाले दशकों में मौसम बुरी तरह खराब हो सकता है। एक ताजा रिसर्च में पाया गया है कि उत्तरी अटलांटिक की जेट स्ट्रीम किस तरह 1250 साल में बदली है। इस स्टडी में कहा गया है कि GHGs का उत्सर्जन ऐसे ही चलता रहा तो साल 2060 तक जेट स्ट्रीम की पोजिशन प्राकृतिक रेंज से बाहर निकल जाएगी। इसका असर अटलांटिक के दोनों ओर पड़ेगा।
हवाओं पर पड़ेगा असर
यूनिवर्सिटी ऑफ ऐरिजोना के क्लाइमेट सिस्टम्स सेंटर में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च असोसिएट मैथ्यू ऑस्मन और उनके साथियों ने यह स्टडी की है जो प्रसीडिंग्स ऑफ द नैशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज (PNAS) में छपी है। उत्तर अटलांटिका जेट स्ट्रीम आर्कटिक का चक्कर काटतीं वेस्टरली हवाओं का एक धागा है। इसे पोलर जेट भी कहते हैं।
ऊंचाई पर चलने वाली इन हवाओं का उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के मौसम और जलवायु पर असर पड़ता है। दोनों जगहों पर सालाना बारिश और तापमान पर 10-50% के बीच असर होता है। अब तक इतिहास में इनकी स्थिति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।
