दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर कोई बेटी अपनी शादी में हिंसा या प्रताड़ना की शिकायत करती है, तो माता-पिता को उसकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर कोई बेटी अपनी शादी में हिंसा या प्रताड़ना की शिकायत करती है, तो माता-पिता को उसकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए।
उसे यह कहकर चुप नहीं कराना चाहिए कि शादी बचाने के लिए समझौता कर ले। बेटी का मायके लौटना परिवार के लिए शर्म की बात नहीं होनी चाहिए।
अदालत ने कहा कि शादी से ज्यादा जरूरी महिला की सुरक्षा और सम्मान है। उसे मदद देने के लिए किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार नहीं करना चाहिए।
