Google Analytics Meta Pixel
विदेश

अपनी शर्तों पर अमेरिका से बात करने वाला ईरान झुकने को तैयार नहीं, खामनेई तय करेंगे सब कुछ

मस्कट। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य तनाव और महीनों की तल्खी के बीच कूटनीति की एक नई किरण दिखाई दी है। ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण लेकिन अप्रत्यक्ष वार्ता संपन्न हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पिछले साल अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद पूरा क्षेत्र युद्ध के मुहाने पर खड़ा था। इस वार्ता में ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने संदेशवाहक की भूमिका निभाई, क्योंकि दोनों देशों के प्रतिनिधि एक मेज पर आमने-सामने नहीं बैठे। हालांकि, इस बातचीत के तुरंत बाद अमेरिका द्वारा नए प्रतिबंध लगाने के फैसले ने इस सकारात्मक शुरुआत पर अनिश्चितता के बादल भी मंडरा दिए हैं।
इस उच्च स्तरीय बैठक में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर ने किया। ओमान द्वारा जारी आधिकारिक तस्वीरों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मौजूदगी ने दुनिया का ध्यान खींचा, जिससे संकेत मिलता है कि बातचीत में सुरक्षा और सैन्य सुरक्षा के पहलुओं पर भी चर्चा हुई है। गौरतलब है कि इस वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान परमाणु समझौते और मानवाधिकारों के मुद्दे पर कड़ा रुख नहीं अपनाता, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका देश खुली आंखों से कूटनीति कर रहा है और अतीत की सैन्य घटनाओं को भूला नहीं है।
ईरान ने ओमान के माध्यम से अमेरिका को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसे वर्तमान संकट को टालने की एक कोशिश माना जा रहा है। ईरान का रुख इस वार्ता में काफी सख्त और स्पष्ट रहा; उसने साफ कर दिया कि वह केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने को तैयार है। ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और घरेलू राजनीति जैसे मुद्दों को बातचीत के एजेंडे से बाहर रखने की शर्त रखी है। इसके विपरीत, वाशिंगटन चाहता है कि एक व्यापक समझौता हो जिसमें ईरान की मिसाइल तकनीक और मानवाधिकारों का मुद्दा भी शामिल हो। इस कूटनीतिक कवायद का सबसे विवादास्पद पहलू वार्ता के तुरंत बाद अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंध रहे। अमेरिका ने ईरानी तेल का परिवहन करने वाले 14 जहाजों और कई संबंधित कंपनियों को काली सूची में डाल दिया है। व्हाइट हाउस का आरोप है कि ईरान तेल निर्यात से प्राप्त धन का उपयोग अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता फैलाने और अपने नागरिकों के दमन के लिए करता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत उन देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि बातचीत और प्रतिबंध की यह दोहरी नीति ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन यह देखना शेष है कि क्या ईरान इन शर्तों के साथ अगली बैठक में शामिल होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *