चुनाव आते ही पाकिस्तान के प्रति बांग्लादेशी नेताओं में जागी हमदर्दी, भारत पर मढ़ने लगे आरोप
ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव नजदीक आते ही भारत-विरोधी बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक नेता के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीएनपी नेता ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान बंगाली बुद्धिजीवियों के नरसंहार के लिए पाकिस्तानी सेना की बजाय भारत की ओर इशारा किया है। इस बयान को न केवल ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत-विरोधी राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि ऐसे नेता पाकिस्तान से हमदर्दी रखते हैं जो भारत का विरोध कर रहे हैं।
बीएनपी की नारायणगंज शहर इकाई के सदस्य सचिव एडवोकेट अबू अल यूसुफ खान टिपू ने रविवार को शहीद बुद्धिजीवी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक चर्चा कार्यक्रम में कहा कि 1971 में बंगाली बुद्धिजीवियों की सामूहिक हत्या पाकिस्तानी सेना ने नहीं, बल्कि एक पड़ोसी देश की सेना ने की थी। उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से भारत की ओर इशारा करता माना गया। टिपू के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी आलोचना हुई, जिसके बाद बीएनपी ने औपचारिक रूप से खुद को इस बयान से अलग कर लिया।
