अमेरिका का पाकिस्तान को लिंक-22 देने से इनकार, पुरानी टेक्नोलॉजी थमाई
वाशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए 686 मिलियन डॉलर का पैकेज मंजूर किया है। दिखावे में यह डील पाकिस्तान की वायुसेना की ताकत बढ़ाने जैसी लगती है, लेकिन गहराई से देखें तो यह नई क्षमता नहीं, बल्कि पुराने विमानों को किसी तरह घसीटकर उड़ाए रखने की कोशिश है। इस पैकेज में पाकिस्तान को एक भी नया एफ-16 नहीं मिला है। न कोई लंबी दूरी का घातक हथियार, न एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल और न ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम।
अमेरिका ने साफ तौर पर पाकिस्तान को सिर्फ मेंटेनेंस, रिपेयर और सेफ्टी से जुड़ा सामान दिया है, ताकि कोल्ड वॉर दौर के ये जेट 2040 तक किसी तरह सेवा में बने रहें। सबसे अहम बात यह है कि पाकिस्तान को जिस डेटा लिंक टेक्नोलॉजी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वह लिंग-22, उसे अमेरिका ने सिरे से देने से इनकार कर दिया है। लिंग-22 को आज की तारीख में लिंग-16 से कहीं ज्यादा आधुनिक, जैम-प्रूफ और लंबी दूरी तक काम करने वाला सिस्टम माना जाता है। यह टेक्नोलॉजी नाटो के चुनिंदा देशों और हाई-एंड फाइटर जेट्स तक ही सीमित है।
