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Saturday, May 16, 2026
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भिक्षा आश्रित घर में दूषित पानी से हुई मौतें, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए निर्देश

नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भिक्षा आश्रित के गृहों की स्थिति में सुधार के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह फैसला दिल्ली के लामपुर भिक्षा गृह में दूषित पानी के कारण हुई मौतों से संबंधित मामले पर दिया गया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि इन गृहों को अब दंडात्मक केंद्र नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना के अनुरूप पुनर्वास और गरिमा देने वाले स्थानों में बदला जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि देश के भिक्षावृत्ति विरोधी कानून औपनिवेशिक मानसिकता की उपज हैं, जिनका मकसद गरीबी को अपराध मानना था, न कि उसका समाधान निकालना। इस सोच से बाहर आना अब जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की 24 घंटे के भीतर मेडिकल जांच अनिवार्य होगी। हर महीने स्वास्थ्य जांच और रोग निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। पीने का साफ पानी, स्वच्छ शौचालय, कीट नियंत्रण और उच्च स्वच्छता मानक सुनिश्चित किए जाएंगे। दो साल में एक बार स्वतंत्र बुनियादी ढांचा ऑडिट अनिवार्य होगा। अधिक भीड़ पर रोक, केवल स्वीकृत क्षमता तक ही निवासी रह सकेंगे। साफ हवा और खुली जगह वाले सुरक्षित घर उपलब्ध कराने होंगे। हर गृह में पोषण विशेषज्ञ नियुक्त होंगे जो भोजन की गुणवत्ता और पोषण मानकों की जांच करेंगे। एक मानकीकृत डाइट चार्ट बनाया जाएगा जिससे पोषण की कमी न हो।
पीठ ने कहा, भिक्षा गृहों को अब ऐसे स्थान के रूप में देखा जाना चाहिए जहां पुनर्प्राप्ति, कौशल विकास और समाज में पुनः एकीकरण की प्रक्रिया हो। गृह शब्द अपने आप में सुरक्षा, गरिमा, अपनापन और देखभाल का प्रतीक है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी इंतजाम को, जो जेल जैसे हालात बनाता है। जैसे भीड़भाड़, गंदगी, जबरन या मनमाने तरीके से बंद करना, इलाज से इनकार, मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा, या व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर रोक को नीति की विफलता नहीं, बल्कि संविधान

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