Virtual Credit Card से पेमेंट करना होगा आसान, जानें क्या हैं इसके फायदे और नुकसान
आज के समय में हम कोशिश करते हैं कि हम ज्यादा से ज्यादा अपना समय कैसे बचाएं। समय की बचत करने में तकनीक ने काफी मदद किया है। जी हां, टेक्नोलॉजी ने जहां एक तरफ हमें स्मार्ट बनाया है तो वहीं दूसरी तरफ इसने किसी भी काम को स्मार्ट तरीके से करना भी सिखाया है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण आज के समय में हो रहे लेन-देन की प्रक्रिया है। पिछले 15 साल पहले लेनदेन के लिए हमें बैंक जाना पड़ता था पर अब हम चंद सेकेंड्स में आसानी से ऑनलाइन पेमेंट कर देते हैं।
जहां एक तरफ ऑनलाइन पेमेंट ने ट्रांजैक्शन को आसान बनाया है तो दूसरी तरफ इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी में भी वृद्धि देखने को मिली है। क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के डिटेल्स और डेटा चोरी होने का खतरा बना रहता है। हम भले ही कोशिश करते हैं कि हम सिक्योर तरीके से पेमेंट करें पर इसके बावजूद यह खतरा बना रहता है। ऐसे में अब इस खतरे को कम करने के लिए हमारे पास वर्चुअल क्रेडिट कार्ड का ऑप्शन भी रहता है। हम आपको नीचे इस कार्ड के बारे में विस्तार से बताएंगे।
क्या होता है वर्चुअल क्रेडिट कार्ड?
वर्चुअल क्रेडिट कार्ड फिजिकल क्रेडिट कार्ड की तरह ही होता है। इस कार्ड को मुख्य तौर पर ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह कार्ड बैंक द्वारा जारी किया जाता है। बता दें कि यह कार्ड आपके फिजिकल क्रेडिट कार्ड अकाउंट से लिंक होता है। इस कार्ड में अस्थायी नंबर होता है। इस नंबर के जरिये ही आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शॉपिंग आदि कर सकते हैं। यह कार्ड आपकी शॉपिंग और कार्ड डिटेल्स को एक लेयर पर सिक्योरिटी देता है।
वर्चुअल क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए यूजर के पास बैंक अकाउंट होना अनिवार्य है। यह कार्ड बैंक जारी करता है, ऐसे में हर बैंक में इनके फीचर और सर्विस भी अलग होती है। अगर आप वर्चुअल क्रेडिट कार्ड पाना चाहते हैं तो आसानी से बैंक के पोर्टल या औप पर जाकर जनरेट कर सकते हैं।
