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चुनावी बॉन्ड: शेल कंपनियों के जरिए हो सकता है दुरुपयोग, जब RBI के पूर्व गर्वनर उर्जित ने जताई थी चिंता

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने 2 जनवरी 2018 को चुनावी बॉण्ड स्कीम को नोटिफाई किया था। सरकार ने पुरजोर तरीके से कहा था कि इससे चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता आएगी क्योंकि न तो बॉण्ड के जरिए चंदा देने वाले का नाम सार्वजनिक होता है और न ही चंदा लेने वाली पार्टी का। हालांकि, इसी बात को लेकर सवाल उठे थे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी शेल कंपनियों के जरिए दुरुपयोग हो सकने जैसी कुछ चिंताएं जताई थीं।

चुनावी बॉण्ड पर जुड़े विचार-विमर्श के दौरान तत्कालीन RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने 14 सितंबर 2017 को वित्त मंत्री को लिखा था, ‘अभी इलेक्टोरल बॉण्ड को बेयरर इंस्ट्रूमेंट के रूप में जारी करने पर विचार किया जा रहा है। हमारी आशंका यह है कि खासतौर से शेल कंपनियों के जरिए इनका दुरुपयोग हो सकता है। इससे RBI की साख पर आंच आने का खतरा भी है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग वाले लेन-देन में सहयोग कर रहा है।’

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