आर अश्विन के रिटायर्ड आउट के बाद छिड़ी बहस,
आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे रविचंद्रन अश्विन ने बीते रविवार को एक ‘चाल’ चली। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ उस मैच में उनकी टीम की जीत से ज्यादा उनके ‘रिटायर्ड आउट’ वाली चाल की चर्चा रही। अश्विन ने बाद में प्रतिक्रिया दी कि क्रिकेट में तो हम इस तरह की स्ट्रैटिजी को अपनाने में काफी देरी कर चुके हैं। अश्विन ने कहा कि जिस तरह फुटबॉल में सब्स्टि्यूट का इस्तेमाल होता रहा है, उसी तरह उन्होंने रिटायर्ड आउट का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की चीजें आगे भी देखने को मिलेंगी।
बोलर पिटे तो क्या होगा
सही है, खेल में प्रयोग होते भी रहना चाहिए। हालांकि, अगर अश्विन ने वह चाल बैटिंग करते हुए चली। मगर, क्या होगा अगर एक बोलर भी अपने ओवर के बीच में ‘रिटायर’ होना चाहे? रिटायर चोट की वजह से नहीं बल्कि अपनी खराब लय या पिटने की वजह से। क्योंकि बोलर तो पैर, कमर, पीठ या हाथ की मांसपेशियों में खिंचाव या फिर गिरने, फिसलने से चोटिल होने की स्थिति में तो मैदान से बाहर जाते रहे हैं। अगर बोलर इस वजह से अपने ओवर की कुछ गेंदें डालने के बाद हटना चाहे या फिर कप्तान उसको मोर्चे से हटाना चाहे कि वह बाउंड्री खा रहा है या फिर लय में नहीं दिख रहा है, तो फिर क्या होगा?
नहीं खेल पा रहे थे बड़े शॉट्स
अश्विन ने रिटायर्ड आउट का ऑप्शन इसलिए चुना था कि वह बड़े शॉट्स नहीं मार पा रहे थे। वह छठे नंबर पर बैटिंग करने उतरे थे और 18वें ओवर तक उनकी टीम चार विकेट पर 133 रन तक ही पहुंच सकी थी। इसी वजह से अश्विन 19वें ओवर की दूसरी गेंद खेलकर पविलियन लौट गए। वह रिटायर्ड आउट हो गए ताकि डगआउट में बैठे बिग हिटर्स क्रीज पर आएं और बड़े सिक्स लगाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा सकें। ऐसा हुआ भी, जब उनके साथी बैटर्स ने अगली 10 गेंदों में टीम का स्कोर 165 तक पहुंचा दिया। उनकी टीम इस करीबी मैच में महज 3 रन से जीती। यहां यह स्ट्रैटिजी कारगर रही थी।
