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निजीकरण के अधिकतम लाभ के लिए सॉलिड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जरूरी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एअर इंडिया की बिक्री को भारत में निजीकरण की कवायद में मील का पत्थर करार दिया है। भारत सरकार के इस फैसले का IMF-STI रीजनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर और IMF इंडिया मिशन के पूर्व प्रमुख अल्फ्रेड शिपका ने स्वागत किया है।

2,700 करोड़ कैश और 15,300 करोड़ के कर्ज में बिक रही

घाटे में चल रही एअर इंडिया को टाटा ग्रुप ने खरीदा है। उसे सरकार ने 11 अक्टूबर को लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी किया था। सरकार कंपनी को 2,700 करोड़ रुपए के कैश के अलावा 15,300 करोड़ रुपए के कर्ज के साथ बेच रही है। उसने टाटा ग्रुप के टैलेस का ऑफर इसी महीने स्वीकार किया था।

टाटा को एअर इंडिया और AISATS में 50% शेयर मिलेंगे

जब टाटा ग्रुप सरकार के लेटर ऑफ इंटेंट को स्वीकार करेगी, तब उनके बीच एअर इंडिया के लिए शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) होगा। डील के तहत टाटा को एअर इंडिया के साथ AISATS में उसकी 50% हिस्सेदारी और एअर इंडिया एक्सप्रेस का मालिकाना हक मिलेगा।

अधिकतम लाभ के लिए मीडियम टर्म प्राइवेटाइजेशन प्लान जरूरी

भारत पर तैयार की गई IMF की एनुअल रिपोर्ट में शिपका ने कहा कि निजीकरण का ज्यादा से ज्यादा फायदा पाने में उसके मीडियम टर्म प्लान, सॉलिड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, कॉम्पिटिटिव मार्केट और अहम स्टेकहोल्डर के निवेश में इजाफे की बड़ी अहमियत होती है। इसके लिए निजीकरण के बुरे असर को कम से कम रखना और सोशल सेफ्टी नेट को मजबूत करना जरूरी होता है।

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