गांव वालों को गलत साबित करना चाहती थीं
हौसलों से बड़ी से बड़ी बाधा पार की जा सकती है। यह साबित किया है हरियाणा के सोनीपत जिले के मदीना की पहलवान सोनम मलिक ने। छोटे से गांव से निकलकर टोक्यो तक का सफर तय करने वाली 19 साल की सोनम ने सड़क तक पर प्रैक्टिस की है। 62 किग्रा की नेशनल चैंपियन सोनम वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप में दो गोल्ड जीत चुकी हैं। जानिए कैसे चोट से उबरकर सोनम ने देश-दुनिया में नाम रोशन किया…
सवालः आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस एकेडमी में शुरुआत की। उस समय एकेडमी में मैट भी नहीं होती थी? तब कैसे तैयारी करती थीं?
जवाबः हमने सुभाषचंद्र बोस एकेडमी से शुरुआत की। उस समय वहां मैट सहित अन्य सुविधाएं नहीं होती थीं। अखाड़े में प्रैक्टिस करते थे। उस दौरान अगर बारिश हो जाती थी तो सड़क पर प्रैक्टिस करते थे। गांव में बातें करते थे कि लड़की है क्या करेगी। अब मैं उनको झूठा साबित करना चाहती हूं। खेल में अच्छा करूंगी और उनको जवाब दूंगी।
सवालः आपने किसी बड़ी एकेडमी में जाकर प्रैक्टिस क्यों नहीं की?
जवाबः पापा किसान हैं। खेती करने वालों के पास उतना पैसा नहीं होता है। इसलिए शहर जाकर महंगी एकेडमी में प्रैक्टिस नहीं कर पाते। मेरा यही रहा है कि कहीं भी रहूं बस प्रैक्टिस करनी है।
