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व्यापार

QCO टेस्टिंग के महंगे खर्च से MSME परेशान, GTRI ने उठाई आवाज

नई दिल्ली। भारत में उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (क्यूसीओ) के नियम अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं। प्रमुख थिंक टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने मंगलवार को सरकार से आग्रह किया है कि रूटीन औद्योगिक उत्पादों की टेस्टिंग के लिए ली जाने वाली फीस की एक अधिकतम सीमा तय की जाए।

छोटे आयातकों के कारोबार से बाहर होने का खतरा

जीटीआरआई के मुताबिक, क्वालिटी कंट्रोल नियमों के तेजी से विस्तार के कारण टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे एमएसएमई के लिए अनुपालन संबंधी बड़ी बाधाएं पैदा हो गई हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि भारत के बढ़ते क्वालिटी कंट्रोल ढांचे के कारण टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की लागत इतनी अधिक हो गई है कि कई एमएसएमई आयातक कारोबार से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अगर ऐसा होता है, तो बाजार पर पूरी तरह से बड़े आयातकों का दबदबा कायम हो जाएगा।

15-20 लाख रुपये का शुरुआती खर्च बना चुनौती

यह सारा खर्च ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) की ‘फॉरेन मैन्युफैक्चरर्स सर्टिफिकेशन स्कीम’ (एमएफसीएस) के कारण उत्पन्न हो रहा है। इस नियम के तहत, विदेशी कंपनियों को भारत में सामान भेजने से पहले BIS सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य है।

इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई कदम उठाने पड़ते हैं:

एक अधिकृत भारतीय प्रतिनिधि नियुक्त करना।
तकनीकी दस्तावेज जमा करना।
बीआईएस द्वारा विदेशी फैक्ट्री का निरीक्षण।

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