क्यूबा सरकार का बड़ा फैसला, कूटनीतिक असर संभव
हवाना|अमेरिका के साथ बढ़ती तनातनी के बीच क्यूबा ने सख्त संदेश देते हुए राजधानी हवाना स्थित अमेरिकी दूतावास का डीजल आयात का अनुरोध पूरी तरह ठुकरा दिया है। क्यूबा की सरकार के इस फैसले को केवल अमेरिकी दूतावास में ईंधन के मसले के तौर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौती और ट्रंप को खुला दो टूक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। ऊर्जा को लेकर ट्रंप प्रशासन की धमकियों और ब्लैकमेल के बावजूद क्यूबा के इस सख्त संदेश ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि क्यूबा ने अमेरिकी दूतावास की डीजल आयात करने की अनुमति देने की अनुरोध को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिससे ऊर्जा संकट और कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। क्यूबा सरकार ने यह फैसला ट्रंप प्रशासन की तरफ से देश पर लागू ईंधन ब्लॉकएड के बीच लिया है, जिससे क्यूबा को विदेश से तेल और डीजल की आपूर्ति मुश्किल हो गई है।
दूतावास में डीजल आयात करना चाहता था
बताया जा रहा है कि अमेरिकी दूतावास अपने जेनरेटर के लिए डीजल इम्पोर्ट करना चाह रहा था, क्योंकि लंबे समय से बिजली कटौती और ऊर्जा संकट के कारण दूतावास की रोजमर्रा की कामकाज में कठिनाइयां आ रही हैं। अमेरिका की तरफ से क्यूबा में ईंधन ब्लॉकएड लागू करने के बाद देश में डीजल की कमी इतनी गंभीर हो गई है कि अमेरिका के विदेश विभाग ने हवाना में अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने पर विचार शुरू कर दिया है। हालांकि अगर ऐसा होता है कि तो संभव है कि क्यूबा भी अपनी वाशिंगटन दूतावास में कर्मचारियों की संख्या घटाने की मांग करे।
अब समझिए क्यूबा में ईंधन की कमी का कारण
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि क्यूबा को पहले मुख्य रूप से तेल वेनेजुएला से मिलता था। लेकिन अब वहां से तेल नहीं आ रहा है। अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ संबंधों को रोक दिया है और किसी
