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AI Futureएआई आने से इंसानों की जगह नहीं लेगी मशीन’, सिस्को के अधिकारी ने बताया कैसे बदलेंगे रोजगार के मौके

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच कॉरपोरेट जगत और आम लोगों में यह डर सता रहा है कि क्या मशीनें इंसानों की जगह ले लेंगी? सिस्को के प्रेसिडेंट और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर जीतू पटेल ने इन चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका मानना है कि एआई इंसानों को बेमानी नहीं बनाएगा, बल्कि यह मानवीय क्षमता और मूल्य को और बढ़ाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

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एआई और मानवीय समझ का तालमेल

पटेल के अनुसार, असली कामयाबी तब मिलती है जब इंसानी समझ और निर्णय लेने की क्षमता को एआई के ऑटोमेशन के साथ मिलाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चैटबॉट से लेकर ऑटोनॉमस एजेंट तक, एआई सिस्टम तेजी से उन्नत हो रहे हैं, लेकिन इन्हें इंसानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, न कि उन्हें बदलने के लिए। पटेल ने अपनी मां के अस्पताल में भर्ती होने का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी एआई किसी नर्स की जगह नहीं ले सकता। इंसानों में प्यार, समझ और देखभाल की बुनियादी जरूरत होती है, जिसे कोई मशीन पूरा नहीं कर सकती है।

रोजगार और नए उद्योगों पर असर

ऑटोमेशन के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पटेल ने माना कि काम का तरीका बदलेगा और कुछ पुरानी नौकरियां खत्म हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि हर नौकरी का स्वरूप बदलेगा और एआई के कारण पूरी तरह से नए उद्योग और अवसर पैदा होंगे।मशीनें सहानुभूति, रचनात्मकता और समाज में योगदान देने की इंसानी फितरत

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