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दिल्ली के वसंत विहार की एयर इंडिया कॉलोनी में पली-बढ़ीं तृप्ति डिमरी के सपनों की उड़ान घर के सांस्कृतिक माहौल से शुरू हुई

दिल्ली के वसंत विहार की एयर इंडिया कॉलोनी में पली-बढ़ीं तृप्ति डिमरी के सपनों की उड़ान घर के सांस्कृतिक माहौल से शुरू हुई। पिता दिनेश डिमरी रामलीला मंच के सक्रिय कलाकार रहे, लेकिन हालातों ने उनके अभिनय के सपने को पेशे में बदलने नहीं दिया।

शायद वही अधूरा सपना तृप्ति की आंखों में आकार लेने लगा। दिल्ली पब्लिक स्कूल से पढ़ाई और श्री अरबिंदो कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री के दौरान मॉडलिंग का एक छोटा-सा मौका मिला, जिसने उन्हें मुंबई तक पहुंचा दिया। संतूर के विज्ञापन से शुरुआत हुई, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं था। रिश्तेदारों ने ताना मारा कि एक्ट्रेस बनने के बाद कोई शादी नहीं करेगा।

इंडस्ट्री में उनके लुक और अपीयरेंस को लेकर जज किया गया। ऑडिशन में रिजेक्शन झेले, टिपिकल हीरोइन न दिखने की टिप्पणी की गई। कई बार आत्मविश्वास टूटा, मगर माता-पिता का साथ उनकी ताकत बना रहा।

‘पोस्टर बॉयज’ से डेब्यू के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ। ‘लैला मजनू’ जैसी संवेदनशील फिल्म ने अभिनय की पहचान दी, पर व्यावसायिक असफलता ने फिर शून्य पर ला खड़ा किया। ‘बुलबुल’ और ‘कला’ में कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की मजबूत अभिनेत्री के रूप में सराहना मिली, लेकिन व्यापक लोकप्रियता दूर थी।

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