भिखारी बना आतंकी मसूद अजहर का बेटा, डिजिटल भिखारी बनकर आतंक के लिए जुटा रहा फंड
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में वर्तमान सत्ता और सैन्य नेतृत्व के संरक्षण में आतंकी संगठनों ने फंड जुटाने के लिए अब दान-धर्म और मानवीय संवेदनाओं को अपना नया हथियार बना लिया है। हाल ही में आई एक विस्तृत रिपोर्ट ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन वैश्विक निगरानी से बचने के लिए भीख मांगने के तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। ये संगठन अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रिय हैं और दुनिया भर से दया की भीख मांगकर आतंकवाद की जड़ें मजबूत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में पाकिस्तान का रिकॉर्ड हमेशा से संदिग्ध रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के लिए पाकिस्तान ने कई बार कागजी कार्रवाई तो की, लेकिन जमीनी स्तर पर आतंकी फंडिंग रोकने के लिए कोई ठोस संस्थागत कदम नहीं उठाए। यही कारण है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन अब खुलेआम नए रातों पर चल रहे हैं।
