भारी बारिश से फसल बर्बाद, ग्रामीणों की आर्थिक हालत पर बढ़ा दबाव
व्यापार: त्योहारों में चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। सितंबर में ग्रामीण उपभोक्ताओं की धारणा के सूचकांक में 11.6 फीसदी की गिरावट आई है। इतनी बड़ी गिरावट पिछली बार मई, 2021 में आई थी। उस समय कोरोना के कारण ऐसा हुआ था। इससे त्योहारों में ग्रामीण लोग घरेलू सामानों की कम खरीदी कर सकते हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक, सितंबर, 2025 में सामान्य परिस्थितियां अधिक आशावादी थीं। पर बारिश ने सब पर पानी फेर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर वह महीना होता है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर भारत से विदा हो जाता है। अक्तूबर के मध्य तक पूरी तरह से विदा हो जाता है। इस दौरान कम बारिश होती है। हालांकि, इस साल अगस्त अंत और सितंबर की शुरुआत में जिन इलाकों में फसलें पक चुकी थीं या कटाई के करीब थीं, वहां बारिश ने अच्छी पैदावार की संभावनाओं को कम कर दिया। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात व महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में ऐसा हुआ।
इससे किसान परिवार संभावित फसल परिणामों को लेकर निराश हो गए। सितंबर में आई गिरावट के पीछे एक और कारण अगस्त में ग्रामीण क्षेत्रों में आई तेजी है। अगस्त में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। ऐसी अचानक वृद्धि अक्सर कमजोर आधार के कारण होती है या उसके बाद गिरावट आती है। सितंबर में आई गिरावट अत्यधिक बारिश के कारण किसान परिवारों की भावनाओं में आई कमी और अगस्त में आई तेजी के उलट होने को दर्शाती है। ज्यादातर परिवार अब वर्तमान आर्थिक स्थितियों और भवि
