Google Analytics Meta Pixel
व्यापार

इरडाई का प्रस्ताव: बीमा कंपनियां मनमाने तरीके से नहीं बढ़ा सकेंगी प्रीमियम

व्यापार : स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से राहत मिलने के बाद एक और फैसला पॉलिसीधारकों को खुश कर सकता है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडाई) सालाना स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम वृद्धि की सीमा तय कर सकता है। इसके लिए जल्द ही परामर्श पत्र जारी हो सकता है। इसमें संबंधित दिशा निर्देश दिए जाएंगे।

स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र की स्थिरता और पॉलिसीधारकों की सामर्थ्य के बीच संतुलन बनाने की योजना पर नियामक काम कर रहा है। इरडाई ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जो स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम वृद्धि की सीमा को चिकित्सा महंगाई के अनुरूप निर्धारित करेगा। देश में स्वास्थ्य बीमा मूल्य निर्धारण की वर्तमान स्थिति पर कई चिंताएं हैं।

कई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां कम प्रीमियम के साथ शुरू की जाती हैं। बाद में भारी बढ़ोतरी कर दी जाती है। इससे पॉलिसीधारकों के पास सीमित विकल्प बचते हैं, क्योंकि प्रीमियम लगातार उनकी पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों के अलावा अन्य नागरिकों को प्रीमियम वृद्धि का खामियाजा ज्यादा भुगतना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि साल के शुरू में इरडाई ने वरिष्ठ नागरिकों के प्रीमियम में एक साल में 10 फीसदी वृद्धि की सीमा लगा दिया था। 2024-25 में सामान्य बीमा उद्योग के प्रीमियम में स्वास्थ्य बीमा का योगदान 40 फीसदी रहा।

युवा पॉलिसीधारकों को उठाना होगा ज्यादा खर्च

इरडाई की चिंता है कि अन्य क्षेत्रों में ज्यादा प्रीमियम के कारण युवा पॉलिसीधारकों को खर्च उठाना पड़ सकता है। बीमा कंपनियां खर्च घटाएं तो प्रीमियम और घट जाएगा। दावों व स्वास्थ्य सेवा वितरण की बढ़ती लागत ग्राहकों पर ही पड़ती है।

स्वास्थ्य बीमा से ज्यादा कमा रहीं कंपनियां

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड कुल प्रीमियम का 30% स्वास्थ्य बीमा उत्पादों से कमाती है। न्यू इंडिया एश्योरेंस कुल प्रीमियम का 50 फीसदी स्वास्थ्य बीमा से कमा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *