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फिनलैंड-स्वीडन के NATO में शामिल होते ही ‘हार’ जाएगा रूस

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पूरे यूरोप में तनाव पसरा हुआ है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि एक-दो देशों को छोड़कर पूरा का पूरा यूरोप रूस के खिलाफ हो चुका है। इस बीच फिनलैंड और स्वीडन ने नाटो में शामिल होने का ऐलान कर रूस की टेंशन और ज्यादा बढ़ा दी है। फिनलैंड के राष्ट्रपति सौली निनिस्टो ने खुद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन कर नाटो में शामिल होने की जानकारी दी थी। ऐसा माना जा रहा है कि स्वीडन भी जल्द ही नाटो में शामिल होने का औपचारिक ऐलान कर सकता है। ऐसे में स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होते ही रूस की घेराबंदी और कड़ी हो जाएगी। नाटो सेना रूस और फिनलैंड की 1340 किलोमीटर की लंबी सीमा के नजदीक आ सकती है। इन दोनों देशों की सीमा ठंडी झीलों और देवदार के जंगलो से घिरी हुई है। उधर, पोलैंड के नाटो में शामिल होते ही रूसी नौसेना के उत्तरी फ्लीट का मुख्यालय और बाल्टिक सागर का सैन्य अड्डा कलिनिनग्राद खतरे में आ सकता है।

रूस के डर से 12 सदस्यीय नाटो अब 32 होने जा रहा
1949 में शीत युद्ध की शुरुआत में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में केवल 12 सदस्य थे। 1991 के सोवियत पतन के बाद 11 पूर्वी यूरोपीय राष्ट्र जो मास्को के सैटेलाइट स्टेट हुआ करते थे और तीन सोवियत देश इस गठबंधन में शामिल हो गए। ऐसे में सदस्य देशों की संख्या अचानक बढ़कर 26 हो गई थी। बाद में एक-एक कर इस गठबंधन में देश जुड़ते गए और नाटो के सदस्य देशों की संख्या 30 तक पहुंच गई। अब फिनलैंड और स्वीडन के शामिल होते ही यह आंकड़ा बढ़कर 32 हो जाएगा। नाटो के विस्तार को रूस शुरू से अपने अस्तित्व के खतरे के रूप में देखता है। पुतिन ने इसी कारण 24 फरवरी को यूक्रेन में स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन का ऐलान किया था। ऐसे में फिनलैंड और स्वीडन के नाटो में शामिल होने के ऐलान को रूस के लिए एक बड़ी हार के रूप में देखा जा रहा है।

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