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व्यापार

ब्रिटेन के बेडफोर्ड में दुनिया की सबसे बड़ी लिस्टेड आइसक्रीम कंपनी मैग्नम की रिसर्च लैब में अजीब सी पीली रोशनी टिमटिमा रही

ब्रिटेन के बेडफोर्ड में दुनिया की सबसे बड़ी लिस्टेड आइसक्रीम कंपनी मैग्नम की रिसर्च लैब में अजीब सी पीली रोशनी टिमटिमा रही है। यह कोई प्रयोग नहीं, बल्कि इबीजा के क्लबर्स के लिए बनाई गई ‘ग्लो-इन-द-डार्क’ आइसक्रीम कुल्फी है।

यह विटामिन-बी 2 की बदौलत यूवी लाइट में चमकती है। यह चमक सिर्फ मार्केटिंग गिमिक नहीं, बल्कि करीब 1 लाख करोड़ रुपए मार्केट कैप वाली कंपनी की एक खास रणनीति का हिस्सा है। यह कंपनी 5 साल से यूक्रेन युद्ध, कोविड महामारी और अब होर्मुज जल मार्ग जैसे संकट के बीच लगातार बढ़ती डेयरी, अंडे, कोको और कोल्ड-चेन एनर्जी की लागत से जूझ रही है। यूनिलीवर से अलग हुई इस कंपनी के पास मैग्नम, कॉर्नेटो, ट्विस्टर और सोलेरो जैसे बड़े ब्रांड हैं, लेकिन हैगन-डाज की मालिक फ्रोनेरी और बास्किन-रॉबिंस जैसे दिग्गजों के साथ-साथ छोटे आर्टिजन ब्रांड भी बाजार में मुकाबला कड़ा कर रहे हैं। ऐसे में टिके रहने का एक ही रास्ता है- लगातार इनोवेशन।

मैग्नम दुनियाभर में करीब 30 लाख फ्रिज ऑपरेट करती है। इनमें से कई अब कैमरों से लैस हैं। ये कैमरे एआई की मदद से पहचानते हैं कि कौन-सी आइसक्रीम कितनी बिकी और फ्रिज कब खाली हो रहा है, ताकि सप्लाई चेन ज्यादा स्मार्ट बन सके। लेकिन असली इनोवेशन अब पश्चिम नहीं, एशिया से आ रही है। जापान, कोरिया और चीन में फ्लेवर एक्सपेरिमेंट चरम पर हैं- हैम, पिकल्ड गार्लिक, ताहिनी और यहां तक कि स्टिंकी टोफू और वोदका-फॉय ग्रा जैसे स्कूप बाजार में आ चुके हैं। चीन में आइसक्रीम अब सिर्फ गर्मियों की चीज नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। इस होड़ में मैग्नम का एक रोबोट भी शामिल है। नाम है ‘एरिक’, जो 24 घंटे चॉकलेट कोटिंग की परफेक्ट मोटाई और क्रंच पर डेटा जुटाता रहता है, ताकि हर बाइट पहले जैसी ही स्वादिष्ट बनी रहे।

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