रीवा की APS यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला, रामायण-बघेली पर होगा शोध
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में श्रीराम के जीवन पर आधारित रामायण शोध पीठ की स्थापना की जा रही है. एपीएसयू रीवा देश का पहला विश्वविद्यालय बनने जा रहा है जहां रामायण शोध पीठ की स्थापना हो रही है।
विश्वविद्यालय की तरफ से बजट दिया गया
इसके लिए विश्वविद्यालय के द्वारा 38 लाख रुपए घाटे का बजट दिया गया है. रामायण शोधपीठ के लिए 70 लाख रुपए तो वहीं बघेली पीठ के लिए 40 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसका निर्माण कार्य अब जल्द शुरू किया जाएगा. वहीं जो घाटे का बजट प्रस्तुत किया गया है, उसकी प्रतिपूर्ति विश्वविद्यालय द्वारा नवीन व्यावसायिक और रोजगार मुखी पाठ्यक्रमों का संचालन किया जाएगा।
रामायण शोधपीठ की स्थापना कहां होगी?
यह सौगात विंध्य और रीवा के लिए बड़ी सौगात है. रामायण शोधपीठ की स्थापना ओरछा में की जाएगी, इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को 2 एकड़ जमीन भी दी गई है. बघेली शोधपीठ की स्थापना रीवा के विश्वविद्यालय परिसर में की जाएगी, जो विलुप्त होती बघेली भाषा जो अपनी बघेली बोली के लिए जाना जाता है वह पहचान दिलाएगा।
विशेष रामायण संग्रहालय की स्थापना होगी
विश्वविद्यालय की कुल सचिव सुरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि जगतगुरु रामभद्राचार्य के द्वारा इसका शुभारंभ किया गया था और बघेली शोधपीठ और रामायण शोधपीठ की स्थापना बिना के लिए बड़ी उपलब्धि जो विश्वविद्यालय के द्वारा शुरुआत की जा रही है.उन्होंने कहा रामायण शोध पीठ के माध्यम से रामकथा से जुड़े ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक एवं साहित्यिक पहलुओं पर गहन अध्ययन और शोध को बढ़ावा दिया जाएगा. साथ ही, ओरछा में एक विशेष रामायण संग्रहालय की स्थापना भी की जा रही है, जहां शोध सामग्री, पांडुलिपियां, मूर्तियां, चित्र और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज संरक्षित किए जाएंगे।
रामायण शोध पीठ की स्थापना क्यों की जा रही है?
