मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विभागों के लिए 10 हजार 617 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित
हमारी सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
सरकार ने दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाएं की स्वीकृत: 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का किया गया सृजन
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास का पहुंच रहा है उजाला: नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांव शतप्रतिशत विद्युतीकृत
आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में हो रहा खर्च
सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता
मंत्रालय से लेकर मैदानी अमले तक कार्य संस्कृति में दिखाई दे रहा स्पष्ट बदलाव
रायपुर, 17 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 612 करोड़ 29 लाख 20 हजार रूपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय 30 करोड़ 92 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 3 हजार 105 करोड़ 11 लाख 80 हजार रूपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय 1145 करोड़ 89 लाख 99 हजार रूपए, विमानन विभाग से संबंधित व्यय 314 करोड़ 99 लाख 90 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 416 करोड़ 99 लाख 99 हजार रूपए, सुशासन एवं अभिसरण विभाग से संबंधित व्यय 77 करोड़ रूपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय 469 करोड़ 99 लाख रूपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय 4236 करोड़ 01 लाख 61 हजार रूपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय 208 करोड़ 50 लाख रूपए शामिल हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी है और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में बजट प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले दो बजटों की थीम ‘ज्ञान’ और ‘गति’ थी, जबकि इस बार बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज समाप्त किए हैं, जिसके कारण आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में खर्च हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व 5 हजार 110 करोड़ रुपए था, जो वर्तमान सरकार में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है। यह अंतर फर्जीवाड़े पर रोक लगने के कारण आया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने माओवादी आतंकवाद के अंत का लक्ष्य तय कर उसी दिशा में प्रभावी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास जताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए उत्सव का क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन, जवानों की वीरता और प्रदेशवासियों के विश्वास से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत कर शांति, पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 12 हजार 305 करोड़ रुपए रहा वहीं वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 11 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किसानों, माताओं-बहनों और आम नागरिकों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।
भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पावर प्लांट्स की कुल विद्युत क्षमता 30 हजार मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 24 हजार मेगावाट है। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता और प्लांट लोड फैक्टर देश के अग्रणी राज्यों में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एनर्जी समिट के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 32 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का काम प्रगति पर है तथा 8300 मेगावाट क्षमता की पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 6 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली की सतत आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने हेतु 354 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की खपत पर राहत देने के लिए 800 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े राज्य अनुदान के लिए 400 करोड़ रुपए और डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना के तहत 8 लाख 83 हजार कृषि पंप उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के लिए 5 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुदान के कारण सोलर प्लांट्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और उपभोक्ता अब केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास का उजाला पहुंच रहा है और नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांवों को शतप्रतिशत विद्युतीकृत किया जा चुका है।
