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AI: UIDAI का एआई सुरक्षा कवच, एक अरब पहचान सुरक्षित; 2028 तक डाटा सेंटर्स की पानी मांग 11 गुना बढ़ेगी

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एक अरब से अधिक भारतीयों की पहचान में सेंध लगने से रोकने के लिए एआई आधारित अगली पीढ़ी के डिजिटल सुरक्षा ढांचे की शुरुआत की है। अदृश्य ढाल कहलाने वाली ये पहल आधार नामांकन और अपडेट के दौरान फिंगरप्रिंट, चेहरे और आईरिस की सटीकता बढ़ाती है ताकि डुप्लिकेट आईडी न बन सकें। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय की तरफ से मुहैया कराई गई जानकारी के मुताबिक, भारत में डिजिटल सुरक्षा ढांचे को मजबूती प्रदान करने के लिए यूआईडीईआई की तरफ से शुरू की गई यह प्रणाली एआई-सक्षम है, जो त्वरित कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करके चुटकियों में करोड़ों गणनाएं कर लेती है। आधार पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित बनाने वाली यह प्रणाली मल्टी लेयर है जो अदृश्य ढाल की तरह नागरिकों के विश्वास और डाटा विश्वसनीयता की रक्षा सुनिश्चित करती है। यूआईडीएआई प्रत्येक नागरिक की एक विशिष्ट पहचान के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक डुप्लीकेशन सिस्टम में से एक का संचालन करता है। प्रत्येक नए आधार नामांकन का संपूर्ण पंजीकृत आधार डेटाबेस से मिलान किया जाता है ताकि उसकी विशिष्टता सुनिश्चित हो सके। इस सुरक्षा ढांचे को और मजबूती देने के लिए यूआईडीएआई ने हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से उंगलियों के निशान, चेहरे और आंखों की पुतली जैसी सभी बायोमेट्रिक पद्धतियों के लिए स्वदेशी रूप से उन्नत एआई मॉडल विकसित किए हैं।

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