भारत से रिश्ते सुधारने को तड़प रहा है चीन, मंत्री बोले – हम खतरा नहीं, अवसर हैं
नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों और पश्चिमी प्रभुत्व को मिल रही चुनौतियों के बीच एशिया की दो महाशक्तियों, भारत और चीन ने अपने रिश्तों को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का ठोस संकेत दिया है। मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय रणनीतिक वार्ता के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वे एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि विकास के साझेदार हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के कार्यकारी उप-विदेश मंत्री मा झाओशू ने द्विपक्षीय संबंधों की जटिलताओं को सुलझाने और भविष्य का रोडमैप तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की।
चीन के कार्यकारी उप-मंत्री मा झाओशू इन दिनों ब्रिक्स बैठकों के सिलसिले में भारत के दौरे पर हैं। इस दौरान हुई वार्ता में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय हालातों के साथ-साथ दोनों देशों की घरेलू और विदेश नीतियों पर स्पष्ट और गहन विमर्श हुआ। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भारत और चीन का साथ आना अनिवार्य है। चीन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि दोनों राष्ट्रों को अपने संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, जिससे न केवल इन दो देशों बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ को मजबूती मिले। वार्ता के दौरान आपसी विश्वास को बहाल करने और मतभेदों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने तय किया है कि वे वर्ष 2026 और 2027 में एक-दूसरे की ब्रिक्स अध्यक्षता का पूर्ण समर्थन करेंगे। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका और बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। चीन ने यह भी संकेत दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका और आकांक्षाओं का सम्मान करता है।
