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ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी की याचिका खारिज की, बैंक ऑफ इंडिया का मुकदमा तय समय पर चलेगा

लंदन। लंदन हाईकोर्ट ने हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका देते हुए बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के बकाया ऋण से जुड़े मुकदमें को स्थगित करने की उसकी याचिका खारिज कर दी है। भगोड़े नीरव मोदी ने दृष्टिहीनता, अवसाद और जेल की परिस्थितियों का हवाला देते हुए सुनवाई टालने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
यहां बताते चलें कि 54 वर्षीय नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े करीब दो अरब अमेरिकी डॉलर के धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत प्रत्यर्पण का सामना कर रहा है। वह उत्तरी लंदन की एचएमपी पेंटनविले जेल में बंद है और बैंक ऑफ इंडिया के लगभग 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अलग मामले में वीडियो लिंक के जरिए मुकदमा-पूर्व समीक्षा के लिए पेश हुआ। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस साइमन टिंकलर ने कहा कि नीरव मोदी को मुकदमे में किसी तरह की “महत्वपूर्ण क्षति” नहीं होगी और 23 मार्च से शुरू होने वाले आठ दिवसीय ट्रायल में उसे समान अवसर मिलेंगे। अदालत ने टिप्पणी की कि यह याचिका देरी की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।
नीरव मोदी की ओर से बैरिस्टर जेम्स किनमैन ने दलील दी कि दक्षिण लंदन की एचएमपी थेम्साइड जेल से स्थानांतरण के बाद उसे कानूनी दस्तावेजों तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि मोदी अपनी आंखों की 60 प्रतिशत रोशनी खो चुका है और नैदानिक अवसाद से पीड़ित है। हालांकि बैंक ऑफ इंडिया के बैरिस्टर टॉम बेस्ली ने अंतिम समय में दायर याचिका का विरोध किया।
नीरव 2019 से हैं ब्रिटेन की जेल में बंद
नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद है। भारत में उसके खिलाफ सीबीआई और ईडी की ओर से धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और साक्ष्य से छेड़छाड़ के तीन मामले चल रहे हैं। अप्रैल 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री प्रीति पटेल ने उसके प्रत्यर्पण का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ उसकी कई अपीलें अब तक खारिज हो चुकी हैं।

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